Sunday, 9 February 2014

इंसान का हो इंसान से भाईचारा

इंसान का हो इंसान से भाईचारा 
यही पैगाम हमारा 
यही पैगाम हमारा 
नए जगत में हुआ पुराना 
उंच नीच का किस्सा 
सबको मिले मेहनत के मुताबिक 
अपना अपना हिस्सा 
सबके लिए सुख का बराबर 
हो बंटवारा 
यही पैगाम हमारा 
यही पैगाम हमारा 


हरेक महल से कहो के 
झोपड़ियो में दिए जलाये 
छोटो और बड़ो में अब कोई 
फर्क न रह जाये 
इस धरती पर हो प्यार का
 घर घर उजियारा
 यही पैगाम हमारा
 यही पैगाम हमारा
 इंसान का हो इंसान से भाईचारा
 यही पैगाम हमारा
 यही पैगाम हमारा 
                                    -रवि प्रदीप 

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